Sunday, March 20, 2022

मेरा बाल मन और बचपन नवोदय की गोद में

 मेरा बाल मन और बचपन नवोदय की गोद में 

नमस्कार मान्यवर।
आज मैं ब्लॉग नहीं एक संस्मरण लिख रहा हूं जो मेरे बाल मन पर बचपन की एक बड़ी गहरी छाप के ऊपर आधारित है।
बात उन दिनों की है जब मैं नया-नया नवोदय के छात्रावास में प्रवेश पाया था।
घर से दूर अकेले 6 बरस के एक अबोधबालक का इस तरह छात्रावास में प्रवेश पाना वह छात्रावास में रहना एक अलग ही अनुभव था।

Childhood memories


मैं संकोची प्रवृत्ति का बालक था जो अपनी सारी बातें खुलकर किसी को नहीं बता पाता था। लेकिन शुरुआत के ही कुछ वर्षों में या यूं कहें महीना में मैंने अपने एक साथी को ढूंढ लिया था जिसकी प्रवृत्ति मुझसे बिल्कुल ही भी  थी। थोड़े ही समय में हमारी दोस्ती बहुत गहरी हो गई थे यद्यपि हमारे घर एक दूसरे से बहुत दूर थे लेकिन फिर भी हमारी संस्कृति भाषा और कल्चर एक दूसरे से काफी मेलजोल खाते थे। उसी समय से मेरे बाल मन में फेयर टू अननोन का भाव समाप्त हो गया था या यूं कहें कि मुझे अनजान लोगों से डर लगना बंद हो गया था इसी चीज ने आगे चलकर भी मेरे कैरियर में मेरा साथ दिया जो छाप मेरे बाल मन में 10:00 11 साल की उम्र में पड़ गई थी वह आज भी मुझे मेरे जीवन में आगे बढ़ने के लिए मुझे मदद करती है। हमारे समय में नवोदय में डबल डेकर बेड का प्रचलन होता था यानी कि 2 मंजिला बेड ऊपर वाले बेड पर सीडी चढ़कर जाना होता था लेकिन नीचे वाले बेड में ऐसा कुछ नहीं था। ऊपर वाले बेड पर सोने का अनुभव सुरक्षा का अनुभव कराता था लेकिन मैंने हमेशा नीचे वाला बेड ही चुना और अपने भय से लड़ा।
हमेशा कमजोर बालकों को मैं अपना बेड यदि ऊपर वाला मुझे अलॉट होता था तो मैं दे देता था क्योंकि मुझे डर नहीं लगता था यह भावना मुझे नवोदय विद्यालय से ही मिली है।
दूसरों के लिए अपने डरो से डरना मैंने नवोदय से ही सीखा था इस भावना ने भी मुझे जीवन पर्यंत मदद की है एक बेहतर इंसान बनने में।
जीवन में जो आप करते हो उसका बहुत सारा श्रेय आपके बाल मन को जाता है। बाल मन में जो छाप आपके मन पर भर्ती है वह जीवन पर्यंत आपके साथ चलती है। जीवन के शुरुआती वर्षों में जो आपने सीखा होता है वह आपके आने वाले जीवन को शेप देता है।
आपके कार्यकलापों में वह झलक हमेशा ही रहती है जो आपने बचपन में सीखा होता है। नवोदय ने मेरे जीवन को एक सशक्त जीवन बनने में सहायता की है तथा मुझे एक बेहतर इंसान बनाने में नवोदय का बहुत बड़ा हाथ है। मैं हमेशा नवोदय के छात्रावास समय को याद करता हूं और जीवन के संघर्षों से पार पाता हूं धन्य है वह जो नवोदय के अध्यापक गण वह अन्य कर्मचारी जिन्होंने हमें अपने बच्चों की तरह प्रेम दिया सद्बुद्धि दे और हमें एक समृद्ध जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। एक महान नेता जी ने कहा था कि नवोदय स्कूल आधुनिक भारत के मंदिर होंगे जहां से भारत का नव निर्माण करने वाले निर्भीक सुदृढ़ संकल्प छात्र निकलेंगे भविष्य के लिए। मैं उनकी बात से एकदम इत्तेफाक रखता हूं।
चलिए फिर मिलते हैं कभी किसी ने ब्लॉग में जल्दी ही।

 आपका प्यारा 

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